राजस्थान में शॉर्ट-टर्म रेंटल

राजस्थान विरासत बेचता है। जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और पुष्कर – हर शहर की अपनी मज़बूत छवि है: महल और बाज़ार, झीलें, नीला शहर, रेगिस्तानी क़िला, पवित्र सरोवर और उसका मेला। मेहमान अक्सर ऐसे घर में रुकना चाहते हैं जो उसी कहानी का हिस्सा लगे – आँगन वाली हवेली, क़िले की ओर खुलती छत, या बग़ीचे के चारों ओर कमरों वाला पारिवारिक घर।
यात्री कब आते हैं
ठंडे महीने मुख्य सीज़न हैं: विदेशी पर्यटक, देसी परिवार और डेस्टिनेशन वेडिंग का बड़ा बाज़ार, ख़ासकर उदयपुर और जयपुर में। रेगिस्तान की गर्मी कड़ी होती है और घूमने वाले कम आते हैं, जबकि मानसून उदयपुर की झीलों को एक दूसरा, छोटा सीज़न देता है। बहुत से यात्री कई शहरों का सर्किट करते हैं, इसलिए छोटे ठहराव और लचीले चेक-इन आम हैं। मेहमान किरदार और मेहमाननवाज़ी पसंद करते हैं, पर एसी और गर्म पानी पर कोई समझौता नहीं करते।
नियम क्या हैं
राज्य ने राजस्थान होमस्टे (पेइंग गेस्ट हाउस) योजना, 2026 लागू की है, जिसे पर्यटन विभाग ने प्रकाशित किया है। शुरुआत के समय आई रिपोर्टों के अनुसार इसमें पहले की वह शर्त हटा दी गई है कि मालिक या परिवार का कोई सदस्य वहीं रहे। प्रॉपर्टी मालिक, लीज़धारक या दिशानिर्देशों के मुताबिक़ नियुक्त केयरटेकर चला सकता है। सीमा आठ कमरे और चौबीस बिस्तर है, पंजीकरण पर्यटन विभाग के स्थानीय दफ़्तर करते हैं, और संचालक को मेहमानों का रजिस्टर रखना और विदेशी मेहमानों की सूचना संबंधित अधिकारियों को देनी होती है।
इस वजह से राजस्थान उन गिने-चुने राज्यों में है जहाँ बाहर रहने वाला मालिक भी घर पंजीकृत कराकर उसे किसी और से चलवा सकता है। फिर भी आवेदन से पहले योजना का पूरा पाठ पढ़ लेना चाहिए।
स्रोत: Rajasthan Homestay (Paying Guest House) Scheme, 2026 (पर्यटन विभाग, राजस्थान सरकार); Business Standard, फ़रवरी 2026।
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